WHY IS SO MUCH HATRED
AROUND US AND NO REMEDY ?
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एक लौ ज़िंदगी की !
गर्दिशों में रेहती,
रेहती गुज़रती
ज़िंदगी - आहें - कितनी ?
इन में से - एक है,
तेरी मेरी आखरी
कोइ एक - जैसी अपनी
पर ख़ुदा , खैर कर - ऐसा अंजाम
किसी रूह को ना दे - कभी - यहाँ
गुझा मुस्कुरता है - क्युं वक़्त से पेहेले
क्युं छोड़ चला तेरा - ये - जहाँ
एक लौ इस तराह - क्युं बुझी मेरे मौला
एक लौ - ज़िंदगी की ! ! ! …………. मौला
एक लौ इस तराह , क्युं बुझी मेरे मौला
एक लौ - ज़िंदगी की ! मौला
धूप के ऊजाले सी - पुन्स की - प्याले सी,
खुशियां मिले हम को !
ज़्यादा मांगा है कहाँ - सरहदें ना हो - जहां,
दुनिया मिले हम को !
पर खुदा खैर कर,
उस के अरमान में - क्युं बेवझा हो - कोइ क़ुरबान
गुझा मुस्कुराता है - क्युं वक़्त
से पहले !
क्युं छोड – चला - तेरा ये जहां ……………..
एक लौ - इस तराह - क्युं बुझी - - मेरे मौला
एक लौ ज़िंदगी की ! मौला
एक लौ - इस तराह - क्युं बुझी - - मेरे मौला
एक लौ ज़िंदगी की ! मौला
एक लौ इस तराह क्युं , बुझी मेरे मौला
एक लौ ज़िंदगी की ! मौला
एक लौ इस तराह क्युं , बुझी मेरे मौला
एक लौ ज़िंदगी की ! मौला
एक लौ इस तराह क्युं , बुझी मेरे मौला
एक लौ ज़िंदगी की ! मौला
एक लौ इस तराह क्युं , बुझी मेरे मौला
एक लौ ज़िंदगी की ! मौला
गर्दिशों में रेहती,
रेहती गुज़रती
ज़िंदगी - आहें - कितनी ?
इन में से - एक है,
तेरी मेरी आखरी
कोइ एक - जैसी अपनी
पर ख़ुदा , खैर कर - ऐसा अंजाम
किसी रूह को ना दे - कभी - यहाँ
गुझा मुस्कुरता है - क्युं वक़्त से पेहेले
क्युं छोड़ चला तेरा - ये - जहाँ
एक लौ इस तराह - क्युं बुझी मेरे मौला
एक लौ - ज़िंदगी की ! ! ! …………. मौला
एक लौ इस तराह , क्युं बुझी मेरे मौला
एक लौ - ज़िंदगी की ! मौला
धूप के ऊजाले सी - पुन्स की - प्याले सी,
खुशियां मिले हम को !
ज़्यादा मांगा है कहाँ - सरहदें ना हो - जहां,
दुनिया मिले हम को !
पर खुदा खैर कर,
उस के अरमान में - क्युं बेवझा हो - कोइ क़ुरबान
गुझा मुस्कुराता है - क्युं वक़्त
से पहले !
क्युं छोड – चला - तेरा ये जहां ……………..
एक लौ - इस तराह - क्युं बुझी - - मेरे मौला
एक लौ ज़िंदगी की ! मौला
एक लौ - इस तराह - क्युं बुझी - - मेरे मौला
एक लौ ज़िंदगी की ! मौला
एक लौ इस तराह क्युं , बुझी मेरे मौला
एक लौ ज़िंदगी की ! मौला
एक लौ इस तराह क्युं , बुझी मेरे मौला
एक लौ ज़िंदगी की ! मौला
एक लौ इस तराह क्युं , बुझी मेरे मौला
एक लौ ज़िंदगी की ! मौला
एक लौ इस तराह क्युं , बुझी मेरे मौला
एक लौ ज़िंदगी की ! मौला
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today is the day 21st and on 21st of May 1991 Shri Rajeev Gandhi was Assasinated by a Human Bomb,a thing never heard before !
WHY DID IT HAPPENED ?
No one has the Answers, simply ,no one !
Kedia Naresh's photos
